Saturday, July 8, 2017

घुघूती बासूती जी की कविता - कब तुम आओगे


घुघूतीबासूती के ब्लॉग घुघूतीबासूती  से उनकी लिखी एक कविता - 


कब तुम आओगे 


7 comments:

देवेन्द्र पाण्डेय said...

नेट बढ़िया नहीं है, लोहे के घर में।

निर्मला कपिला said...

वाह्ह्ह्ह कविता यहीं दे देती आसान काम रखा करो1 समय बचे 1

अर्चना चावजी Archana Chaoji said...

मेरा उद्देश्य उस ब्लॉग तक सबको पहुँचाना भी है,क्योंकि मैंने उस ब्लॉग की एक ही रचना रिकार्ड की जबकि उस ब्लॉग पर कई रचनाएं होती है,जिन्हें पढ़ा जाना चाहिए ...

Kavita Rawat said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (09-07-2017) को 'पाठक का रोजनामचा' (चर्चा अंक-2661) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत सुंदर, आभार आपका.
रामराम
#हिन्दी_ब्लॉगिंग

प्रतिभा सक्सेना said...

अति मनोरम,सुनती रही मगन .